एक समय था दोस्तों जब कुड़ी केन्डी बेबी पहले जैगुआर ले लाउ ,फिर जिना मर्जी प्यार ले लाऊ , कुछ सालो पहले जैगुआर कारs का मार्किट में एक अलग ही जलवा हुआ करता था और जलवा इतना ताखडा की इस कार पर कई सारे गाने भी लिखे गये और सभी गाने सुपर हिट रहे ।
एक समय में जैगुआर लोगो की ड्रीम कार हुआ करती थी लक्ज़री कार सेगंनेट में इसका एक अलग ही लेवल भोकाल हुआ करता था । लेकिन अब लोगो की ड्रीम कार आखिर क्यों मार्किट गायब होती जा रही है। और जिस जैगुआर कंपनी को टाटा मोटर ने दिवालिया होने से बचाया और एक ऊँचे मुकाम पर पहुंचाया आखिर अब उसका ग्राफ डाउन क्यों होता जा रहा है। क्या जैगुआर का नमो निशान मिटने वाला है या फिर जैगुआर वापस कमबैक करेगी।
तो आज के समय में जैगुआर और लैंड रोवर इन दोनों कंपनी को टाटा कंपनी own करती है 2008 में इन दोनों को marge किया गया और JLR बनाया JLR मतलब jaguar and land rover, Overall देखा जाय तो JLR, 2019 से continue loss में चल रही है केवल लैंड रोवर की वजह से ही थोड़ा बहुत खर्चा पानी निकल पा रहा है।
2023 fy का JLR कार सेल्स डाटा देखा जाय तो मार्किट में 86.7% कार लैंड रोवर की सेल हुए है वंही जैगुआर की केवल 13.3 % कार ही सेल हुए है। तो इससे ये क्लियर होता है की JLR के लोस्स में चलने के कारण केवल जैगुआर cars है लेकिन क्यों चलिए जानते है।
जैगुआर car की शुरुआत
थोड़ा टाइम मशीन को पीछे लेकर जाएँ तो दोस्तों जैगुआर कंपनी को सबसे पहले 1922 में Swallow Sidecar Company कंपनी के नाम से फॉउण्डेड किया गया था। शुरुआत में ये कंपनी साइड कार और कार की बॉडी को बनाया करती थी। समय बीतता गया और इनका बिज़नेस बढ़ने लगा और बाद इन्होने standred मोटर कंपनी के साथ मिलकर कम्प्लीट कार बनाना शुरू किया।
सन 1935 में पहली जैगुआर कार बनायीं गयी थी इसका नाम ss jaguar 100, यह एक 2 सीटर स्पोर्ट्स सेडान कार थी। इस कार को मार्किट से काफी अच्छा रेस्पॉन्स मिला इसके बाद 1945 में कंपनी का नाम Swallow Sidecar Company से जैगुआर cars limited रखा गया। 1945 से 1965 तक जैगुआर ने कई सारी कार्स बनाये इनमे सेडान कार्स से लेकर luxury और convertible कार भी शामिल थी।
अब बात आती है सन 1966 की जब जैगुआर को ब्रिटिश मोटर कारपोरेशन के साथ marge कर दिया गया और इसके 2 साल बाद यानि की 1968 में ब्रिटिश मोटर को Leyland Motor Corporation Limited, में marge कर दिया गया। इसके बाद इस कंपनी का नाम british leyland motor corporation रखा गया और फिर यही से शुरू होती है जैगुआर की बर्बादी के दिन।
british leyland motor corporation के पास जैगुआर के आलावा भी कई बेहतरीन luxary स्पोर्ट्स कार के ब्रांड थे इनमे rover ग्रुप जिसको आज हम land रोवर ने नाम से जानते है इसके अलावा astin martin, volvo और Standard-Triumph जैसी कंपनी भी थी। आपकी जानकारी के लिए बता दे अशोक लेलैंड जो की इंडिया की second largest ट्रक एंड बस manufacture कंपनी है यह भी british leyland से अलग हुई थी।
british leyland motor corporation एक अर्धसरकारी कंपनी थी इसके अंदर भी काम से जयदा वही चल रहा था जो हर सरकारी बिभाग में चलता है। british leyland ने जैगुआर की R&D पर कुछ फोकस नहीं किया, इसकी वजह से जैगुआर और ज़्यदा खडडे में जाती रही। और फिर 1984 में जैगुआर ब्रिटिश लेलैंड से अलग हो जाती है लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी होती है जैगुआर को नयी टेक्नोलॉजी और R&D के लिए फाइनेंशियल इशू फेस करना पड़ता है।
फोर्ड का दौर (1989 से 2008 )
अब फोर्ड कंपनी को पता नहीं क्या चुल्ल हुए और इन्होने 1989 में जैगुआर को ख़रीदा लिया और इसमें काफी सारा पैसा इन्वेस्ट किया। नए डिज़ाइन और R & D पर काम किया गया लेकिन फिर भी जैगुआर ट्रैक पर नहीं लोट रही थी और इसके बाद 2000 में फोर्ड ने लैंड रोवर को भी खरीद लिया फिर दोनों कंपनी को एक साथ ऑपरेट किया गया, डिज़ाइन और पार्ट शेयरिंग किया गया। लेकिन फोर्ड इन दोनों ब्रांड को sucessfull बनाने में न कामयाब रहा, बल्कि इन दोनों कंपनी को खरीदने के बाद फोर्ड खुद दिवालिया होने की कगार पर आ गयी थी।
इसलिए नुकशान के चलते 2008 में फोर्ड कंपनी ने land रोवर और जैगुआर को tata motor को बेच दिया लेकिन फोर्ड के लिए जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदना अब तक का सबसे बड़ा घाटा था। फोर्ड ने जैगुआर को 2.5 बिलियन डॉलर में ख़रीदा और लैंड रोवर को 2.7 बिलियन डॉलर में ख़रीदा और खरीदने के बाद इनके रेबिल्डिंग में फोर्ड ने काफी सारा पैसा लगाया था लेकिन इतना पैसा और समय इन्वेस्ट करने के बाद फोर्ड ने केवल 2.3 बिलियन डॉलर में दोनों कंपनी को टाटा मोटर को बेचना पड़ा क्यूंकि उस समय कोई भी इन दोनों कंपनी को खरीदने को तैयार नहीं हुआ।
क्यों टाटा ने जैगुआर और लैंड रोवर को ख़रीदा
लेकिन यहाँ पर एक सवाल यह भी आता है आखिर घाटे में चल रही दोनों कंपनी को टाटा मोटर ने क्यों ख़रीदा ? तो Mrs रतन टाटा जी ने यहाँ पर काफी रणनीति से गेम खेला। जैगुआर और लैंड रोवर को खरीदने के पीछे दो main कारण थे पहला कारण था ,ford कंपनी से revenge यानि की बदला लेना और दूसरा कारण था टाटा मोटर के प्रोडक्ट पोर्टफोलो को बढ़ाना।
ये कहानी तो आपको जरूर पता होगी दोस्तों जब 1999, भारी loss के चलते टाटा मोटर पैसेंजर devison को बेचने लिए उन्होंने Ford Motors से बात की और फोर्ड इसको खरीदने के लिए तैयार भी थी। लेकिन फाइनल मीटिंग में Ford के चेयरमैन Bill Ford ने रतन टाटा जी का मजाक उड़ाया था। फोर्ड ने रतन टाटा जी से कहा, जब तुन्हे कार बनानी नहीं आती है तो तुमने यह बिज़नेस स्टार्ट ही क्यों किया, और यह बात रतन टाटा के दिल पर लग चुकी थी उन्होंने इस डील को कैंसिल किया और वापस इंडिया आकर टाटा मोटर को दुबारा बुलंदियों पर पहुंचाया।
फोर्ड के मालिक ने जो इंसल्ट की थी उसी का बदला रतन टाटा जी ने फोर्ड से लैंड रोवर और जैगुआर को खरीदकार लिया। जब टाटा ने जैगुआर और लैंड रोवर को ख़रीदा तब फोर्ड के मालिक ने रतन टाटा जी का धन्यावाद करते हुए कहा की आप हम पर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हैं।
दूसरा कारण था प्रोडक्ट प्रोटफोलिओ को बढ़ाना , लैंड रोवर और जैगुआर की मदद से टाटा मोटर डायरेक्टली इंटरनेशनल मार्किट घुस सकती थी और इसके साथ इनकी टेक्नोलॉजी भी टाटा मोटर को मिल गयी। तो ये दो मुख्य कारण थे की क्यों टाटा मोटर ने लैंड रोवर और जैगुआर को ख़रीदा। इन दोनों कार कंपनी को खरीदने के बाद दोनों को marge किया गया और जैगवार एंड लैंड रोवर बनाया गया।
कैसे टाटा मोटर ने जैगुआर और लैंड रोवर को loss से प्रॉफिट में बदला
अब टाटा मोटर के सामने सबसे बड़ा चैलेंज था लॉस में चल रही इन दोनों कंपनी को वापस ट्रैक पर लाना का इसके लिए टाटा कंपनी ने इन कार्स के रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस किया और मार्केट जरूरत के हिसाब से बदलाव किया और इसमें टाटा की मेहनत रंग लायी, 2010 में जैगुआर ने 40 सालो में पहली बार प्रॉफिट कमाया उसके बाद 2018 तक JLR का ग्राफ ऊपर ही बढ़ता गया,
लेकिन फिर 2019 से JLR के सेल्स में downfaul शुरू हुआ। इसमें केवल जैगुआर कार का ही सेल्स डाउन हुआ इसके अपोजिट लैंड रोवर का सेल्स इन्क्रेस हुआ। तो जैगुआर के सेल्स डाउन होने के पीछे 4 सबसे बड़े कारण है
1. जैगुआर का आउटडेटेड लुक्स,डिज़ाइन और टेक्नोलॉजी
दोस्तों जैगुआर एक luxury कार ब्रांड है इसलिए जब कोई एक luxury कार खरीदता है वो उसकी कई सारी expectition होती, कार में upgrated फीचर्स एंड टेक्नोलॉजी हो, बढ़िया लुक्स और डिज़ाइन हो etc . इसलिए कार मेकर नए नए मॉडल और फेसलिफ्ट वर्शन को लांच करते रहते है लेकिन जैगुआर का डाटा देखे तो पिछले 5 – 6 सालो से कोई भी नयी कार लांच देखने को नहीं मिला। और इनके जो कार मॉडल उनमे कोई खास बदलाव लम्बे समय से नहीं किया गया है।
2. SUV कार्स का मार्किट क्रेज़
दूसरा सबसे बड़ा कारण है SUV कार का मार्किट क्रेज़, अगर हम पिछले चार सालो का डाटा देखे तो यहाँ पर SUV का मार्किट शेयर 26 % जो की 2020 में था वह 2024 में 50 % क्रॉस कर चूका है यानि की Double, इससे सेडान cars पर भी इसका बुरा असर पड़ा। अब जैगुआर पहले से प्रीमियम लक्ज़री सेडान कार के लिए जानी जाती है। इनके पास पहले से कोई भी SUV कार नहीं थी। 2015 मे जैगुआर ने पहली SUV कार मार्किट में लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी, पहले से ही BMW, Mercedes, ऑडी और land rover जैसे SUVs प्लेयर ने मार्किट में अच्छी पकड़ बना रखी थी। SUV से भी जैगुआर को कोई अच्छा रेस्पॉन्स नहीं मिला।
3. eV और हाइब्रिड कार का क्रेज़
तीसरा कारन है इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कार का चलन, दोस्तों लुक्सुअरी कार का मार्किट ज्य्दातर european कंट्री में और वहां ev और हाइब्रिड कार को ज्यादा बढ़ावा दिया जाता है और पेट्रोल डीज़ल वाली कार्स पर काफी मोटी रकम tax pay करना पड़ता है। और जैगुआर के पास ज्यादातर पेट्रोल और डीज़ल कार ही, हालाँकि जैगुआर ने 2018 एक इलेक्ट्रिक कार JAGUAR I-PACE लांच भी की थी लेकिन कोरोना के बाद semiconductor chips शॉर्टेज के कारण इसका प्रोडक्शन थप पड़ गया था और तब से जैगुआर इसको रिकवर ही नहीं कर पाए।
4. जैगुआर क्वालिटी और रेलिबिल्टी इशू
जब से जैगुआर को फोर्ड ने ख़रीदा जब से जैगुआर की कार्स में क्वालिटी और रेलिबिल्टी इशू देखे गए, इससे ओवरआल ब्रांड का नाम ख़राब हुआ क्यूंकि फोर्ड ने जैगुआर की टेक्नोलॉजी में काफी छेड़छाड़ किया , पार्ट्स शेयरिंग किया।
तो दोस्तों अब सवाल आता है की क्या जैगुआर फिर से कम बैक करेगी या नहीं तो ऑफकोर्स गाइस जैगुआर का अभी भी ब्रांड वैल्यू स्ट्रांग है और ये अब केवल ev टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रहे हैं 25, 26 में कुछ नयी ev कार्स जैगुआर की तरफ आने वाली है। इनमे नया डिज़ाइन टेक्नोलॉजी देखने को मिलेगी।
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